फ़राग़ ही होगा

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सन्नाटे में दमका, वो अक्स नहीं, चराग़ ही होगा।

क़त्ल कर निकला वस्ल में यार का, ना कोई सुराग ही होगा। 

वो नायाब सोम है किसी और जहां के मयख़ाने की,

जो चख सके उसे लब मेरे, तो फ़राग़ ही होगा।

Glossary –
अक्स = reflection or image
चराग़ = oil lamp
वस्ल = meeting or union
सोम = alcohol
फ़राग़ = repose, freedom from care or business

क्यों हम शर्माये?

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शाम थी एक हसीं, जब मिले वो दो साये।

सिरहन थी साँसों में, नज़रें न तुम मिला पाए। 

घुमा-फिरा कर बातें, तुम टटोलते रहे जज़्बात मेरे,

पूछ ही लेते हमसे, “क्यों हम शर्माये ?”

When you are seeing someone but it seems to be a long distance relationship.

This is for the times when they catch up after months. Distance keeps them apart but they still want to see each other as soon as they can. The feelings stay ignited with flames going higher than before every time they meet.

And when they do meet finally, these feelings scream within but stay dodged!

रंजिशें

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हुई रंजिश, जला आशियाँ,
राहों से मेरी, जुदा तेरा मकां।
क़त्ल हुआ महफ़िल-ए-यार में,
दिल में दफ़न था, हाल-ए-बयां।

इस्तक़बाल था लबों पे तेरे, पर खुश्की थी.
सवालिया थी नज़र मेरी, नज़रों की कुश्ती थी.
लतीफ़ों के काफिले में मसरूफ तो थे दोनों,
पर ज़हन के एक कोने में, अनकही, अनसुनी..एक सिसकी थी.

रह रह कर रह गया, वो छूटा नहीं,
सपना हसीन वो, टूट कर भी टूटा नहीं.
होगा वो भी आलम, जब रंजिशें मिटा देगा तू,
इस काफिर के नशों से, तू भी तो अछूता नहीं.

This is when you know that the person is lost. The connection, the bonding, the TRUST is lost. Both of you have mutually lost each other. But, yet, its not over. Some call it a “baggage”, some call it “hope”. For me, its best left unsaid.

Grievances will find their way. And, so would affection and adorability.