वफ़ा का ज़हर

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शिद्दत से छाया था ख़ुमार इक हसीं का,

बादस्तूर चला था सुरूर नाज़नीं का.

इक रोज़ ज़हर दिया, उसने इश्क़ के नाम से,

आज भी चखता हूँ, स्वाद उस करीम का.

When someone suggests to fall in love and enjoy it. saying, “asal zindagi mein bhi kr k dekho….alag maza hai iska” (try to fall for it in reality, it has its own charm).

I replied, “Been there, done that, not again”

कुछ देर ठहर

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रुस्वा तो तूने करना ही है, कुछ देर तो ठहर।

बा-दस्तूर वस्ल-ए-यार मुमक़िन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

जुदाई का आलम अगले मोड़ से है झाँक रहा,

झपक भर का ये साथ छीन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

“When you know that you two have different goals, responsibilities and approach to life: leading to a separation. but you still want to live one more moment with each other.”

अरसा हुआ…

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अरसा हुआ तुझे नज़रें चुराये,

बहरहाल, चाय के प्याले में तेरा ही अक्स है.

पर

मयस्सर नहीं अब हमसे आंखें चार करना,

ना तेरे इंतज़ार में आज ये शख्स है.

Its been a while since then. You do invade my dreams, but not my soul. Anymore.

रास्ता

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माना, उस दोराहे पर हम दोनों बँट गए,

पर जितना साथ काटा, वो रास्ता हसीन था

Mana uss dorahe par hum dono bat gaye,

Par, jitna saath kaata, vo raasta haseen tha.

Parting ways is not always filled with pain if we understand the WHYs and WHY NOTs behind it.