वफ़ा का ज़हर

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शिद्दत से छाया था ख़ुमार इक हसीं का,

बादस्तूर चला था सुरूर नाज़नीं का.

इक रोज़ ज़हर दिया, उसने इश्क़ के नाम से,

आज भी चखता हूँ, स्वाद उस करीम का.

When someone suggests to fall in love and enjoy it. saying, “asal zindagi mein bhi kr k dekho….alag maza hai iska” (try to fall for it in reality, it has its own charm).

I replied, “Been there, done that, not again”

नूर-ए-एहसास

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खुद की हक़ीक़त को अनसुना सा कर दूँ, पर,

तेरी रूह की आरज़ू की मुझको खबर है.

तेरी छुअन को कैसे कुरेदूँ ना,

तेरा नूर-ए-एहसास ही इस कदर है.