वफ़ा का ज़हर

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शिद्दत से छाया था ख़ुमार इक हसीं का,

बादस्तूर चला था सुरूर नाज़नीं का.

इक रोज़ ज़हर दिया, उसने इश्क़ के नाम से,

आज भी चखता हूँ, स्वाद उस करीम का.

When someone suggests to fall in love and enjoy it. saying, “asal zindagi mein bhi kr k dekho….alag maza hai iska” (try to fall for it in reality, it has its own charm).

I replied, “Been there, done that, not again”

कुछ देर ठहर

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रुस्वा तो तूने करना ही है, कुछ देर तो ठहर।

बा-दस्तूर वस्ल-ए-यार मुमक़िन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

जुदाई का आलम अगले मोड़ से है झाँक रहा,

झपक भर का ये साथ छीन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

“When you know that you two have different goals, responsibilities and approach to life: leading to a separation. but you still want to live one more moment with each other.”

मोहब्बत ना कर

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इतनी मोहब्बत ना कर ऐ ज़माने,

कितनी लम्बी है ये रात, कौन जाने?

मायूसियां छा जाएँगी तेरी तन्हाईयों में,

इसका इल्म है तुझे, तू माने.. ना माने.