गुस्ताखियाँ मेरी

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गुस्ताख़ होने से मेरे, रुस्वा तो हुआ ज़माना.

पर तन्हाइयों में सिसकियों का सबब, सूझता भी ना था.

कब तक शिरक़त करते लहू-लुहान दिल के जनाज़े में?

जनाज़े तक में, तकब्बुर से कोई चूकता भी ना था.

When you rebel against the world. for the world doesn’t deserve softer and nicer you. It didn’t lend a hand when you were in need. It just didn’t care. Now you shouldn’t too.