क्यों हम शर्माये?

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शाम थी एक हसीं, जब मिले वो दो साये।

सिरहन थी साँसों में, नज़रें न तुम मिला पाए। 

घुमा-फिरा कर बातें, तुम टटोलते रहे जज़्बात मेरे,

पूछ ही लेते हमसे, “क्यों हम शर्माये ?”

 

This is for the times when they catch up after months. Distance keeps them apart but they still want to see the other one as soon as they can. The feelings stay ignited with flames going higher than before every time they meet.

And when they do meet finally, these feelings scream within but stay dodged!

तेरी दूरियों की वजह से

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सब सुनसान है यहां, तेरी दूरियों की वजह से.

इक तूफाँ है मेरे अंदर, तेरी दूरियों की वजह से.

सैलाब-ए-जज़्ब का रेशमी एहसास नदारद है मेरे आगोश से,

सर्द शाम की तपिश ले आ, जो दूर है… तेरी दूरियों की वजह से.

When distance starts taking a toll on your emotions. Is it really the distance to be blamed or the people?