ख़ाक

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ग़ुनाह हुआ, गुस्ताख़ हूँ.

पर कद्र है तेरी, ना तेरे ख़िलाफ़ हूँ.

माना दिल दुखाया है तेरा, पर तू रुस्वा न हो.

शोला हुआ करता था यारी में तेरी, तेरी रुस्वाई से ख़ाक हूँ.

When you make someone, close to you, shed out tears, only to realise your mistake later.
Saying sorry and meaning it can heal the wound. But scars take their own sweet time.

गुस्ताखियाँ मेरी

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गुस्ताख़ होने से मेरे, रुस्वा तो हुआ ज़माना.

पर तन्हाइयों में सिसकियों का सबब, सूझता भी ना था.

कब तक शिरक़त करते लहू-लुहान दिल के जनाज़े में?

जनाज़े तक में, तकब्बुर से कोई चूकता भी ना था.

When you rebel against the world. for the world doesn’t deserve softer and nicer you. It didn’t lend a hand when you were in need. It just didn’t care. now you shouldn’t too.

वफ़ा का ज़हर

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शिद्दत से छाया था ख़ुमार इक हसीं का,

बादस्तूर चला था सुरूर नाज़नीं का.

इक रोज़ ज़हर दिया, उसने इश्क़ के नाम से,

आज भी चखता हूँ, स्वाद उस करीम का.

When someone suggests to fall in love and enjoy it. saying, “asal zindagi mein bhi kr k dekho….alag maza hai iska” (try to fall for it in reality, it has its own charm).

I replied, “Been there, done that, not again”

तुझे जाने को कहा

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ख़ता मैंने की या सितम मुझ पर हुआ,

तुझे जाने को कहा.. तू लौट कर ना आया.

तेरे जाने का ग़म भी क्या करुँ?

जो लौटा ही नहीं, वो कहाँ मेरा साया?

When u ask her to go away for she doesn’t deserve a jerk like you and she does go away.