कुछ देर ठहर

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रुस्वा तो तूने करना ही है, कुछ देर तो ठहर।

बा-दस्तूर वस्ल-ए-यार मुमक़िन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

जुदाई का आलम अगले मोड़ से है झाँक रहा,

झपक भर का ये साथ छीन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

“When you know that you two have different goals, responsibilities and approach to life: leading to a separation. but you still want to live one more moment with each other.”

तेरी दूरियों की वजह से

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सब सुनसान है यहां, तेरी दूरियों की वजह से.

इक तूफाँ है मेरे अंदर, तेरी दूरियों की वजह से.

सैलाब-ए-जज़्ब का रेशमी एहसास नदारद है मेरे आगोश से,

सर्द शाम की तपिश ले आ, जो दूर है… तेरी दूरियों की वजह से.

When distance starts taking a toll on your emotions. Is it really the distance to be blamed or the people?