हुए जो मुख़ातिब फिर

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ना आयी कोई आवाज़ तेरी, ना थामा मेरा हाथ।

पराया हुआ वो आशियां, जो साझा तेरे साथ।

हुए जो मुख़ातिब फिर, तो ख़ामोश ही रहूंगा।

ख़ामोश था तेरी चौखट पर, अब क्या कहूंगा?

This talks about someone who is leaving his beloved after being ruled out as a heartless fellow.
A circumstance where stepping out of house is stepping out of each others’ lives.