वक़्त देख कर

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नहीं पहनी घड़ी तेरी तस्वीर के सामने,
कहीं रुस्वा ना कर दूं, वक़्त देख कर।
चार बातें की उस से, तो ज़रा वक़्त थमा,
मुस्कुराया ज़रा, मेरा बख़्त देख कर।

निकले कुछ रोज़, फिर हफ्ते, अब महीने हुए,
ताज्जुब में हूँ, अपनी आज़ाद गिरफ्त देख कर।
निकलेगा फिर महताब, वहां भी, यहां भी,
शरमाएगा खुद ही, अपनी शिकस्त देख कर।

नहीं पहनी घड़ी तेरी तस्वीर के सामने,
कहीं रुस्वा ना कर दूं, वक़्त देख कर।

This is for the times when the world is locked down and two of you are not able to meet as often as you used to.
An expression of affection and craving!
Pictures really help. For some, talking to pictures too.

Pro Tip: Confide in moon 😉

Glossary –
बख़्त = Destiny
महताब = Moon

क्यों हम शर्माये?

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शाम थी एक हसीं, जब मिले वो दो साये।

सिरहन थी साँसों में, नज़रें न तुम मिला पाए। 

घुमा-फिरा कर बातें, तुम टटोलते रहे जज़्बात मेरे,

पूछ ही लेते हमसे, “क्यों हम शर्माये ?”

When you are seeing someone but it seems to be a long distance relationship.

This is for the times when they catch up after months. Distance keeps them apart but they still want to see each other as soon as they can. The feelings stay ignited with flames going higher than before every time they meet.

And when they do meet finally, these feelings scream within but stay dodged!

तेरी दूरियों की वजह से

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सब सुनसान है यहां, तेरी दूरियों की वजह से.

इक तूफाँ है मेरे अंदर, तेरी दूरियों की वजह से.

सैलाब-ए-जज़्ब का रेशमी एहसास नदारद है मेरे आगोश से,

सर्द शाम की तपिश ले आ, जो दूर है… तेरी दूरियों की वजह से.

When distance starts taking a toll on your emotions. Is it really the distance to be blamed or the people?

सैलाब-ए-जज़्ब = Storm of emotions