19 की शाम

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एक सिरहन सी हुई थी, 19 की शाम को,
रूह से पुकारा था एक अनजान से नाम को।
नज़र किया जहां अपना उस मरासिम पर हमने,
पर आज बस धुआं ही है, 19 की शाम को।

फिर ख़ानाबदोशी का सा आलम छाया था।
उसके ज़िक्र से कुछ वक़्त मैं हिचकिचाया था।
धूल जम रही है उसकी यादों के बक्से पर अब,
बनाने में जिन यादों को सब कुछ गवाया था।

ना रही उसकी तड़प,
ना कोई कसक ही बाकी है।
था कभी नशा तेरा,
ना अब तू मेरा साक़ी है।

याद है तो बस वो सिरहन जो उठी थी 19 की शाम को।
पर आज बस धुआं ही है, 19 की शाम को।

क्यों हम शर्माये?

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शाम थी एक हसीं, जब मिले वो दो साये।

सिरहन थी साँसों में, नज़रें न तुम मिला पाए। 

घुमा-फिरा कर बातें, तुम टटोलते रहे जज़्बात मेरे,

पूछ ही लेते हमसे, “क्यों हम शर्माये ?”

When you are seeing someone but it seems to be a long distance relationship.

This is for the times when they catch up after months. Distance keeps them apart but they still want to see each other as soon as they can. The feelings stay ignited with flames going higher than before every time they meet.

And when they do meet finally, these feelings scream within but stay dodged!