हुए जो मुख़ातिब फिर

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ना आयी कोई आवाज़ तेरी, ना थामा मेरा हाथ।

पराया हुआ वो आशियां, जो साझा तेरे साथ।

हुए जो मुख़ातिब फिर, तो ख़ामोश ही रहूंगा।

ख़ामोश था तेरी चौखट पर, अब क्या कहूंगा?

This talks about someone who is leaving his beloved after being ruled out as a heartless fellow.
A circumstance where stepping out of house is stepping out of each others’ lives.

कुछ देर ठहर

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रुस्वा तो तूने करना ही है, कुछ देर तो ठहर।

बा-दस्तूर वस्ल-ए-यार मुमक़िन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

जुदाई का आलम अगले मोड़ से है झाँक रहा,

झपक भर का ये साथ छीन नहीं, कुछ देर तो ठहर।

“When you know that you two have different goals, responsibilities and approach to life: leading to a separation. but you still want to live one more moment with each other.”